नई दिल्ली। भारतीय महिला कुश्ती के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश की प्रतिभाशाली पहलवान मनीषा भानवाला ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की पहलवान एबिगेल नेट को 8-6 से हराकर विश्व चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं।
मनीषा की यह जीत इसलिए भी खास रही, क्योंकि फाइनल मुकाबले में एक समय वह 0-6 से पिछड़ रही थीं। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए मुकाबले का रुख पलट दिया। अंतिम क्षणों तक संघर्ष जारी रखते हुए उन्होंने 8-6 से जीत दर्ज की और देश को गौरवान्वित कर दिया।
0-6 से पिछड़कर की ऐतिहासिक वापसी
फाइनल मुकाबले में अमेरिकी पहलवान एबिगेल नेट ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और मनीषा पर 6-0 की बढ़त बना ली। मुकाबला एकतरफा नजर आने लगा था, लेकिन मनीषा ने हार मानने के बजाय अपनी रणनीति बदली। इसके बाद उन्होंने लगातार अंक जुटाते हुए शानदार वापसी की और स्कोर 8-6 तक पहुंचाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
उनकी इस जुझारू जीत ने साबित कर दिया कि आखिरी क्षण तक हौसला और संघर्ष बनाए रखा जाए तो मुश्किल से मुश्किल मुकाबला भी जीता जा सकता है।
16 साल बाद भारत को मिला नया विश्व चैंपियन
मनीषा भानवाला की इस उपलब्धि ने भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जोड़ दिया है। इससे पहले वर्ष 2010 में दिग्गज पहलवान सुशील कुमार ने पुरुषों के 66 किलोग्राम भारवर्ग में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बने थे।
अब करीब 16 साल बाद मनीषा भानवाला ने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय कुश्ती को नई पहचान दिलाई है। वह सुशील कुमार के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी भारतीय पहलवान बन गई हैं।
विनेश फोगाट भी नहीं जीत पाई थीं विश्व चैंपियनशिप का गोल्ड
भारतीय कुश्ती की स्टार पहलवान विनेश फोगाट ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था, लेकिन वह इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर सकीं।
ऐसे में मनीषा भानवाला की यह उपलब्धि भारतीय महिला कुश्ती के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने उस स्वर्णिम उपलब्धि को हासिल किया है, जिसका भारतीय महिला कुश्ती लंबे समय से इंतजार कर रही थी।
भारतीय कुश्ती के लिए नई प्रेरणा बनीं मनीषा
मनीषा भानवाला की ऐतिहासिक जीत केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की युवा महिला पहलवानों के लिए नई प्रेरणा भी है। उनके प्रदर्शन ने दिखाया है कि आत्मविश्वास, मेहनत और आखिरी क्षण तक संघर्ष करने का जज्बा किसी भी चुनौती को जीत में बदल सकता है। मनीषा की इस उपलब्धि से भारतीय कुश्ती को नई ऊर्जा मिली है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव और बढ़ा है।



