by admin on | May 3, 2025 02:14 PM
प्रकाश विद्यालय किरंदुल में हादसे का इंतजार: 50 साल पुरानी जर्जर बिल्डिंग, टूट रहा मलवा, फिर भी सब खामोश
अभिभावकों की मजबूरी, स्कूल की मनमानी
जिला शिक्षा अधिकारी की जांच या महज खानापूर्ति?
किरंदुल (छत्तीसगढ़): प्रकाश विद्यालय, किरंदुल, जिसे क्षेत्र में इंग्लिश मीडियम का प्रतिष्ठित स्कूल माना जाता है, आजकल गंभीर आरोपों और खुलासों के घेरे में है। पहले किताबों, यूनिफॉर्म, डायरी और स्कूल फीस में भारी लूट की खबरें सामने आईं, और अब एक नया खुलासा अभिभावकों को डर के साए में जीने को मजबूर कर रहा है। विद्यालय की 50 साल से अधिक पुरानी बिल्डिंग अब जर्जर हो चुकी है, जहां छत से मलवा टूट-टूटकर गिर रहा है। गनीमत रही कि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन सवाल यह है कि बच्चों की जिंदगी के साथ यह खिलवाड़ कब तक चलेगा?
जर्जर बिल्डिंग, टूटी छत और लापरवाही का आलम
एक अभिभावक ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि प्रकाश विद्यालय की पुरानी बिल्डिंग की हालत बेहद खराब है। कई कक्षाओं में छत का हिस्सा टूटकर गिर चुका है, और छत के किनारे भी क्षतिग्रस्त हैं। उन्होंने बताया, "कुछ समय पहले एक कक्षा में छत का मलवा गिरा, शुक्र है कि उस वक्त बच्चे वहां नहीं थे, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।" 50 साल से अधिक पुरानी इस बिल्डिंग की मरम्मत पर स्कूल प्रबंधन का ध्यान न होना उनकी प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है। अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल सिर्फ कमाई पर ध्यान दे रहा है, बच्चों की सुरक्षा से उसे कोई सरोकार नहीं।
जिला शिक्षा अधिकारी की जांच या महज खानापूर्ति?
सीजी संविधान न्यूज़ द्वारा किताबों की लूट की खबर उजागर होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच टीम गठित की थी। लेकिन अभिभावकों का कहना है कि इस जांच का कोई नतीजा सामने नहीं आया। स्कूल प्रबंधन अपनी मनमानी में मस्त है, और बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। सवाल उठता है कि क्या जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई थी, या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल को खुली छूट दी जा रही है?
नगरपालिका परिषद भी सवालों के घेरे में
प्रकाश विद्यालय की जर्जर बिल्डिंग को लेकर किरंदुल नगरपालिका परिषद की भूमिका भी संदेह के दायरे में है। आखिर 50 साल पुरानी, खस्ताहाल बिल्डिंग को अब तक मान्यता कैसे दी जा रही है? क्या नगरपालिका जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है, या फिर इसमें कोई बड़ा खेल चल रहा है? अभिभावकों का कहना है, "जैसा कि कहावत है, कद्दू कटेगा तो सब में बंटेगा। कहीं स्कूल की कमाई का हिस्सा सभी को तो नहीं मिल रहा, जिसके चलते सब खामोश हैं?"
अभिभावकों की मजबूरी, स्कूल की मनमानी
किरंदुल में प्रकाश विद्यालय को इंग्लिश मीडियम का बेहतर स्कूल माना जाता है, जिसके चलते अभिभावक अपने बच्चों को यहां पढ़ाने को मजबूर हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन इस मजबूरी का जमकर फायदा उठा रहा है। किताबों, टाई, मोजे, टी-शर्ट, डायरी और फीस के नाम पर पहले ही अभिभावकों की जेबें खाली की जा रही हैं, और अब जर्जर बिल्डिंग का खुलासा स्कूल की लापरवाही को और उजागर करता है। एक अभिभावक ने गुस्से में कहा, "हम बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए यहां भेजते हैं, लेकिन स्कूल हमारी मजबूरी का फायदा उठाकर सिर्फ पैसा कमा रहा है।"
हादसे का इंतजार क्यों?
जर्जर बिल्डिंग में पढ़ रहे बच्चों की जिंदगी खतरे में है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी, नगरपालिका परिषद और स्कूल प्रबंधन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वे चाहते हैं कि बिल्डिंग की स्थिति की गहन जांच हो, और अगर यह पढ़ाई के लिए सुरक्षित नहीं है, तो स्कूल को तुरंत बंद किया जाए।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी और नगरपालिका परिषद से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्कूल प्रबंधन भी खामोश है। यह चुप्पी सवालों को और गहरा रही है। क्या बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई और हित है, जिसके लिए सब आंखें मूंदे बैठे हैं?
आवाज उठाने का समय
प्रकाश विद्यालय किरंदुल में चल रहे इस गंभीर मामले को नजरअंदाज करना बच्चों के भविष्य और उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और नगरपालिका को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अभिभावकों से भी अपील है कि वे एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें, ताकि स्कूल प्रबंधन की मनमानी और लापरवाही पर लगाम लग सके। आखिर, बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता।
नोट: यह खबर अभिभावकों द्वारा दिए गए बयानों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित पक्षों से जवाब मिलने पर उसे भी शामिल किया जाएगा।
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